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चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन पूजा में जरूर पढ़ें मां चंद्रघंटा की व्रत कथा, सभी कष्टों से मिलेगी मुक्ति!
Dharm Desk

चैत्र और शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान हैं. कहते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा करने से घर में सुख-शांति आती है. मान्यता है कि इस दिन पूजा के दौरान मां चंद्रघंटा की व्रत का पढ़ने तथा सुनान शुभ फलदायी होता है.
आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है. यह दिन मां आदिशक्ति के चंद्रघंटा स्वरूप को समर्पित हैं. मां चंद्रघंटा का स्वरूप बहुत ही शांत, सौम्य और ममतामयी है, जो अपने भक्तों को सुख-समृद्धि और शांति प्रदान करता है. मां चंद्रघंटा को स्वर की देवी भी कहा जाता है. यह सिंह पर सवार मां असुरों और दुष्टों को दूर करती हैं। मां चंद्रघंटा की पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक एवं आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है साथ ही शरीर के सभी रोग और कष्ट दूर होते हैं.
मां चंद्रघंटा की कथा
पौराणिक काथ के अनुसार, मां दुर्गा का पहला रूप मां शैलपुत्री और दूसरा मां ब्रह्मचारिणी स्वरूप जो भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए माना जाता है. जब मां ब्रह्मचारिणी भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त कर लेती हैं तब वह आदिशक्ति के रूप में प्रकट होती है और चंद्रघंटा बन जाती हैं . मां दुर्गा ने मां चंद्रघंटा का अवतार तब लिया था जब संसार में दैत्यों का आतंक बढ़ने लगा था. साथ ही उस समय महिषासुर का भयंकर युद्ध देवताओं से चल रहा था. महिषासुर देवराज इंद्र का सिंहासन प्राप्त करना चाहता था. वह स्वर्ग लोक पर राज करने की इच्छा पूरी करने के लिए यह युद्ध कर रहा था.
जब देवताओं को महिषासुर इच्छा का पता चला तो वे परेशान हो गए और भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सामने पहुंचे. ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने देवताओं की बात सुनकर क्रोध प्रकट किया और क्रोध आने पर उन तीनों के मुख से जो ऊर्जा निकली. उस ऊर्जा से एक देवी अवतरित हुईं. उस देवी को भगवान शंकर ने अपना त्रिशूल, भगवान विष्णु ने अपना चक्र, इंद्र ने अपना घंटा, सूर्य ने अपना तेज और तलवार और सिंह प्रदान किया. इसके बाद मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का वध कर देवताओं की रक्षा की.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है.