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पिया कंगाल प्रेमी मालामाल ..... प्रेमी को मालामाल करने पति को लाखों का चूना लगाने वाली शातिर पत्नी
Satyakatha

शादी के चार महीने बाद ही प्रेमिका की ससुराल में उसका मुंहबोला भाई बनकर पहुंचे आराधना के मायके के प्रेमी आकाश नेमा ने खुद को बड़ों-बड़ों का खास बताते हुए दीदी को टीचर और जीजाजी को पटवारी बनवाने की गारंटी ली थी। जिसके बाद पति की जेब से माल निकालकर प्रेमी की जेब में भरने का काम दीदी बनी प्रेमिका ने कर दिया। पति को पैरों पर लाकर प्रेेमी को लक्जरी कार दिलाने वाली आराधना ने अपने प्रेमी की मदद से घर के सारे सोने के जेवर को हूबहू नकली जेवर से बदल दिया था।
जबलपुर के राइट-टाऊन इलाके में रहने वाले सेवा निवृत राजस्व निरीक्षक रुद्र प्रताप मिश्रा ने पूरी जिंदगी में खुद को इतना असहाय कभी भी महसूस नहीं किया था। राजस्व निरीक्षक जैसे सम्मानीय पद पर रह चुके श्री मिश्रा ने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें ऐसी पैसों की ऐसी तंगी भी झेलनी पड़ेगी।
वह जानते थे कि इस कंगाली का एकमात्र कारण उनकी शातिर बहू आराधना (बदला नाम) और सीधा साधा बेटा आदित्य है जो पत्नी के कहने पर बड़ा धोखा खा चुका था। लेकिन जो हुआ सो हुआ यह सोचकर रुद्र प्रताप सिंह ने अलमारी से अपनी पत्नी के जेवर निकाले और उनके बदले कुछ लोन लेने के लिए एसबीआई की शाखा जा पहुंचे जहां लोन संबंधी लिखा पढ़ी के दौरान उस समय उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई जब बैंक ने उन्हें बताया कि आप जो जेवर लेकर आए हैं उनके बदले में बैंक आपको फूटी कोंड़ी भी लोन के तौर पर नहीं दे सकता क्योंकि सारे के सारे जेवर नकली है।
मिश्रा जी को समझते देर नहीं लगी कि यह करतूत किसी और की नहीं बल्कि उनकी बहू की है। इसलिए उन्होंने घर आकर बहू से उसके जेवर मांगे तो वह सीधे-सीधे जबाव देने के बजाए सांप-गुहेरे दिखाने लगी।
पानी सिर से ऊपर हो चुका था इसलिए बेटे आदित्य ने तुरंत नरसिंहपुर से अपने ससुर को बुलाकर पूरी बात बताने के बाद विवाद टालने के लिए पत्नी को भी उनके साथ मायके भेज दिया। लेकिन अब आदित्य के साथ-साथ उसके पिता भी चुप रहने के लिए तैयार नहीं थे। क्योंकि नकली जेवर कांड से पहले आराधना अपने मुंहबोले भाई की जेब भरने लगभग 40 लाख रुपए का चूना ससुराल को लगा चुकी थी। इसलिए अपनी मेहनत की कमाई को बहू द्वारा यूं अपने आशिक पर लुटा देने से नाराज होकर पिता-पुत्र ने 25 फरवरी को मदनमहल थाने जाकर आराधना और उसने मुंहबोले भाई नरसिंहपुर निवासी आकाश नेमा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवा दिया। इसलिए लगभग 38 लाख की इस ठगी की जांच के बाद पुलिस ने मार्च के पहले हफ्ते में नरसिंहपुर से आराधना और आकाश नेमा को हिरासत में लेकर दोनों ने पूछताछ की जिसमें पहले तो दोनों ही इस मामले में खुद को बेकसूर बताते रहे लेकिन अंतत: उन्होंने मान लिया कि दोनों ने मिली भगत कर पुरानी असली जेवर की जगह नकली जेवर रखकर माल उड़ाया था।
पूछताछ में मालूम चला कि जो 38 लाख रुपए आराधना को टीचर और उसके पति आदित्य को पटवारी बनवा देने के नाम पर आकाश ने उनसे ठगे से उस रकम से कुछ पैसे में आकाश ने अपना मकान बनवाने के अलावा एक लक्जरी कार खरीद ली थी जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया जबकि सोने के असली जेवर दो स्थानों पर आकाश और आराधना ने मिलकर गिरवी रखे हुए थे जिनको भी बरामद कर लेने बाद प्रेमी को मालामाल बनाने के लिए एक पत्नी द्वारा पति को कंगाल कर देने की यह कहानी इस प्रकार सामने आई।
मूलरूप से सिवनी जिले के रहने वाले रुद्र तिवारी राजस्व निरीक्षक के पद से सेवा निवृत होने के बाद जबलपुर में अपना ठिकाना बनाकर रह रहे थे। उनका इकलौता बेटा आदित्य उनके साथ रहता था।
सन 2021 में उन्होंने काफी देखभाल कर बेटे आदित्य की शादी नरसिंहपुर निवासी युवती आराधना के साथ कर दी। शादी के बाद आराधना और आदित्य का वैवाहिक जीवन चैन से बीत रहा था कि तभी इनकी कहानी में आकाश नेमा की ऐंट्री हुई।
शादी के कोई चार महीने बाद जब आकाश पहली बाहर आराधना की ससुराल में आया तो आराधना ने अपने पति से उसका परिचय मुंहबोले भाई के तौर पर करवाया। उसने बताया कि आकाश उसकी सबसे खास सहेली का भाई है इसलिए बचपन से आकाश एक भाई की तरह से उसका ध्यान रखता आया है।
कहते हैं सारी खुदाई एक तरफ और जोरू का भाई एक तरफ, इसलिए आदित्य ने भी आकाश को हाथों-हाथ लिया। इसका एक कारण यह भी था कि आकाश सगा साला होता तो उसके स्वागत में ऊंच-नीच चल भी जाती लेकिन यह तो मुंहबोला साला था इसलिए आदित्य ने उसका पूरा ध्यान रखा।आकाश ने भी आदित्य को सम्मान देने में कोई कसर नहीं रखी। वह आराधना को दीदी कहता था इसलिए जीजाजी कहते हुए आदित्य और उसके पिता जी के पैर छूकर उनका दिल जीत लिया।
दूसरी बार आकाश कोई महीने भर बाद फिर जबलपुर आया तो आराधना ने उससे शिकायत करते हुए कहा कि नरसिंहपुर कोई जबलपुर से दूर नहीं है जो तुम महीने भर बाद आए हो। इस पर आकाश ने हंसते हुए कहा कि दीदी तुम तो जानती हो लोग अपने काम के लिए मेरे पीछे किस तरह से पड़े रहते हैं। इसलिए कभी भोपाल तो कभी दिल्ली के चक्कर लगाने में ही समय नहीं मिलता।
मालूम है मालूम है। सबके काम करवा देना बस एक अपनी दीदी का काम मत करवाना जिसे करवाने का तुमने मुझे वचन भी दे रखा है आराधना ने उसे उलाहना देते हुए आदित्य को बताया कि मालूम है आपको मुझे सरकारी स्कूल में टीचर बनने का बेहद शौक है और आकाश ने मुझसे वादा भी किया था कि वो मेरी नौकरी सरकारी स्कूल में जरूर लगवा देगा। कुछ याद है तुम्हें या नहीं, उसे आकाश से कहा तो आकाश कान पकड़ते हुए बोला याद है दीदी। बस कुछ समय और दे दो फिर अपना दिया वचन जरूर पूरा कर दूंंगा बस आप नाराज न हो और हां काम में जो देरी हुई उसकी सजा के तौर पर मैं जीजाजी को भी मास्टर बनवा दूंगा।
अरे नहीं मास्टरी तो हम लड़कियों को ठीक है जीजाजी को तो तुम पटवारी बनवा दो।
अरे हां, यह तो मैंने सोचा भी नहीं। ओके डन, जीजाजी आप चिंता न करो कुछ वक्त दो मुझे फिर आप पटवारी और मेरी बहन मास्टरनी।
आकाश की बात सुनकर आदित्य भी मन ही मन खुश हो गया। लेकिन औपचारिकता के चलते उसने कहा अरे ठीक है तुम तो अपनी बहन की इच्छा पूरी कर दो। मेरा तो वैसे भी चल ही रहा है। नहीं जीजाजी अब आप पहले हैं और दीदी बाद में। आखिर इतना तो मुझे हक है कि दीदी से पहले जीजाजी का ख्याल रखूं।
अरे वाह तुम तो यहां भी पार्टी बदलने लगे। आकाश की बात सुनकर आराधना ने हंसते हुए कहा। फिर बोली हां आकाश सुनो भले ही मेरी मास्टरी थोड़ी लेट हो जाए। अभी तुम्हारी भोपाल में पकड़ काफी अच्छी है पहले जीजाजी को पटवारी बनवा दो।
इधर थोड़ी देर बाद आकाश चला गया तो आराधना ने अपने पति और ससुर को बताया कि आदित्य की भोपाल की राजनीति ही नहीं बल्कि नौकरशाही में भी बहुत पकड़ है। इसने अपने दो चचेरे भाईयों को तो डीएसपी बनवा दिया है। और भी कितने लोगों के काम करवाये हैं। हां पैसा जरूर लगता है लेकिन मुझसे पैसा थोड़ी न लेगा वो।
वो ठीक है लेकिन देखो ऐसे काम में पैसा तो लगता ही है। इसलिए तुम उससे पूछ लेना जो लगेगा हम दे देंगे पत्नी की बात सुनकर आदित्य ने कहा।
अब आप इतना बोल रहे हो तो मैं उससे पूछ लूंगी। पूंछ क्या लूंगी जबरन उसकी जेब में रख दूंगी। सरकारी नौकरी है जो लगेगा कुछ ही साल में निकल आएगा।
आदित्य ने यह बात अपने पिता को बताई तो उन्होंने साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि रिश्वत देकर ली नौकरी कभी सफल नहीं होती। मालूम नहीं कब भेद खुल जाए। पैसा भी जाएगा और नौकरी भी ऊपर से जेल अलग जाना पड़ेगा। हमें ऐसा काम नहीं करना। भगवान का दिया सब कुछ है हमारे पास।
ससुर ने मना कर दिया तो आराधना को दिल बैठ गया। उसने पति से कहा कि क्या सचमुच आकाश पर भरोसा नहीं करते।
नहीं ऐसी बात नहीं है। लेकिन पिताजी जब तक राजी नहीं होंगे हम पैसा कैसे दे सकते हैं।
न करो उस पर भरोसा, आप को मेरे ऊपर तो भरोसा है न, कि मेरे ऊपर भी नहीं है।
अरे तुम कैसी बातें कर रही हो।
खुली-खुली।
अच्छा गुस्सा न हो। पहले आकाश से बात तो करो। फिर देखते है क्या हो सकता है।
देखते नहीं यह काम करना ही है वर्ना वो कहेगा कहां कि नंगे लोगों के घर शादी हुई है दीदी की।
अगली बार आकाश आया तो आराधना ने उससे काम में लगने वाले पैसों के बारे में पूछा। आराधना की बात सुनते ही वह भड़क गया। उसका कहना था कि वो क्या इतना गया गुजरा है जो बहन से काम के पैसे लेगा। लेकिन आदित्य ने समझाया कि भाई यह पैसा मैं आपके लिए नहीं लेकिन ऊपर जो लगता है वो तो हम से ले लो। आकाश इस पर भी नाटक करता रहा लेकिन उसने बाद में बता दिया कि 25 लाख पटवारी के और 12 लाख रुपए टीचर के काम में लगेंगे।
ठीक है हम काम होते ही इतना दे देंगे आदित्य ने उससे कहा।
अरे काम होते क्या। भैया कहीं भाग थोड़ी न रहा है। हम पहले दे देगे, पति की बात काटते हुए आराधना बोली। जिसके बाद 17 अगस्त 22 से 7 जुलाई 24 के बीच आदित्य ने पिता से छुपकर 38 लाख रूपए आकाश को दे दिए।
पैसा देने के बाद आदित्य काम होने का इंतजार करने लगा। लेकिन जब कई महीने बीतने पर भी न तो उसकी नौकरी लगी और न आराधना की तो उसने आकाश को बार-बार फोन करना शुरू कर दिया जिससे बात आदित्य के पिता तक पहुंच गई।
बेटे ने उनके मना करने के बाद भी लाखों रुपया फंसा दिया था। लेकिन उन्होंने बजाए कोई विवाद करने के बेटे-बहू से कहा कि आकाश से पैसा वापस ले लो। उससे कहो कि हमें नौकरी नहीं चाहिए।
आदित्य ने ऐसा किया। आकाश से पैसा वापस मांगा तो वो तो विवाद करने की लगा खुद आराधना भी आकाश की तरफ हो गई। उसने आदित्य को धमकी दी कि अगर उन्होंने आकाश को परेशान किया तो वह पुलिस में दहेज प्रताडऩा का केस दर्ज करवाकर पूरे परिवार को फंसा देगी।
आराधना की धमकी सुनकर आदित्य और उसके पिता दोनों ही परेशान हो गए। पिता तो समझ गए कि आकाश बहू का भाई नहीं बल्कि कोई और ही है। लेकिन अब वह इकलौते बेटे की जिंदगी खराब नहीं करना चाहते थे इसलिए पैसा गया तो जाने दो यह सोचकर चुप रह गए।
जाहिर सी बात है कि आकाश से पैसों को लेकर विवाद हुआ तो उसका जबलपुर में आराधना की ससुराल आना-जाना बंद हो गया। लेकिन आराधना उससे दिन में कई बार फोन पर बात करती रही। आदित्य ने ऐसा करने से रोका भी मगर वह नहीं मानी।
परिवार की नगदी आकाश के खाते मेंं पहुंच चुकी थी इसलिए बड़ी रकम की जरूरत पडऩे पर जब रुद्र मिश्रा को कोई और रास्ता नहीं दिखा तो वह नवंबर के महीने में पति के जेवर लेकर उनके बदले में बैंक से लोन लेने पहुंचे तो यह राज भी खुल गया कि घर के जेवर असली से नकली में बदल चुके हैं।
आदित्य और उसके पिता दोनों ही जानते थे कि यह किसका काम है इसलिए आदित्य ने पत्नी को मायके भेज दिया। जिसके बाद काफी सोच विचार के बाद परिवार ने 20 फरवरी को बहू और उसके तथाकथित मुंहबोले भाई के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया जिससे एक पत्नी द्वारा रचाए गए खेल का राज खुल गया।
जांच में सामने आया कि एक ही शहर के हमउम्र और एक ही बिरादरी से जुड़े आकाश और आराधना एक दूसरे को बचपन से ही जानते थे। समय के साथ उनकी जान पहचान गहराने के अलावा उनकी दोस्ती भी रंग लाने लगी और किशोर उम्र तक आते-आते दोनों प्यार के बंधन में बंध गए।
जाहिर है कि किशोर उम्र के इश्क को जवानी में रंग दिखाना ही था इसलिए उम्र के इस रंगीन पड़ाव पर आकर उनके बीच नजदीकी इस हद तक बढ़ चुकी थी कि वे एक दूसरे से अलग होकर जिंदगी बिताने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे।
कहा तो यह भी जाता है कि आराधना के परिवार की स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी इसलिए उस समय आकाश ने अपनी प्रेमिका की आगे बढ़कर हर तरह से मदद की थी। आराधना आकाश के अहसानों को बदला उसकी पत्नी बनकर चुकाना चाहती थी लेकिन कई कारणों से इस रिश्ते की बात नहीं बन पाई।
लेकिन आराधना सुंदर तो है ही इसलिए जब आदित्य के सामने उससे विवाह का प्रस्ताव आया तो उसने पल भर की देर किए बिना इस स्वीकार कर लिया। जिसके बाद आराधना आदित्य की होकर जबलपुर आ गई।
आराधना का मन आदित्य के साथ नहीं लग रहा था इसलिए मायके जाकर वह आकाश से मिली और उसने आकाश के सामने प्रस्ताव रखा कि वो दोनों मिलकर उसकी ससुराल का माल लूटने के बाद बाद में आराम से आपस में शादी कर जीवन बिता सकते है। आकाश इस पर राजी हो गया तो योजना अनुसार उसने आराधना का मुंह बोला भाई बनकर आदित्य के घर में आना-जाना शुरू कर दिया। जिसके बाद आराधना ने खुद के मास्टर और पति को पटवारी बनवाने के नाम पर आकाश को पति से 38 लाख रुपए दिलवा दिए। इतना ही नहीं उसने घर के सोने के सारे जेवर भी आकाश की मदद से बदल दिए।
लेकिन इन्ही जेवर को लेकर ससुर जब बैंक में गिरवी रखने पहुंचे तो जेवर के नकली होने की बात सामने आने पर लुटेरी बहू का राज खुलकर सामने आ गया।
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मुंबई से बनवाए नकली जेवर
आराधना ने माना कि उसे चोरी छुपे घर में रखे सोने के सारे जेवरों की फोटो खींचकर आकाश को दे दी थी। जिसके बाद आकाश ने मुंबई जाकर ठीक उसी डिजाइन के नकली जेवर बनवाकर आराधना को दे दिए जिन्हें उसने असली जेवरों से बदल कर असली जेवर आकाश को दे दिए।
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देती थी दहेज प्रकरण में फंसाने की धमकी
बेटे द्वारा आकाश को 38 लाख रुपए देने की बात मालूम चलने पर जब ससुर ने आकाश से पैसा वापस मांगा तो बहू आकाश का बचाव करती रही। इतना ही नहीं उसने पति और ससुर को धमकी दी कि अगर उन्होंने आकाश के खिलाफ कार्रवाई की तो वह ससुराल वालों के खिलाफ दहेज प्रताडऩा का मामला दर्ज करवा देगी।
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मुझे तो पहले से ही शक था
इस संबंध में आदित्य के रिटायर्ड आरआई पिता का कहना है कि मुझे शुरू से ही आकाश और बहू के रिश्ते को लेकर शक था। लेकिन बहू को बुरा न लगे इसलिए मैं चुप रहा। उनका यह भी कहना है कि आकाश अक्सर बेटे के काम पर जाने के बाद घर आकर बहू के साथ घंटो अकेले कमरे में बैठा रहता था।