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स्कूल संचालकों की लूट से अभिभावकों को बचाने कांग्रेस ने सीएस को लिखी चिट्ठी
BHOPAL, MP

कांग्रेस ने प्रदेशभर में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूलने पर अंकुश न लगा पाने को लेकर मुख्य सचिव को पीले चावल के साथ पत्र लिखा है।
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने प्रदेशभर में निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूलने पर अंकुश न लगा पाने को लेकर मुख्य सचिव को पीले चावल के साथ पत्र लिखा है। त्रिपाठी ने कहा है कि स्कूल संचालकों द्वारा महंगी किताबें व ड्रेस कमीशन देने वाली दुकान से खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है जिस पर सरकार कंट्रोल नहीं कर पा रही है। इनके द्वारा फीस भी मनमानी बढ़ाई गई है जिनके खिलाफ कार्यवाही सरकार को करना चाहिए।
त्रिपाठी ने कहा कि निजी स्कूलों द्वारा की जा रही अनुचित शुल्क वसूली, महंगी निजी प्रकाशकों की किताबों की अनिवार्यता तथा आरटीई नियमों के उल्लंघन जैसी गंभीर समस्याओं को कांग्रेस द्वारा समय-समय पर उजागर किया गया पर सरकार कोई एक्शन नहीं ले पा रही है जिससे ऐसी लूट को रोका जा सके। विवेक ने कहा कि हाल ही में जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा निजी स्कूलों पर की गई कार्रवाई से शिक्षा माफियाओं पर अंकुश लगा है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि ऐसी कार्रवाई पूरे प्रदेश में होनी चाहिए ताकि अन्य जिलों में निजी स्कूलों की मनमानी रोकी जा सके और छात्रों व अभिभावकों को राहत मिले। निजी स्कूलों के खिलाफ दर्ज सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों का 15 कार्य दिवस में निराकरण कर उचित कार्यवाही करें। त्रिपाठी ने मुख्य सचिव को इसको लेकर एक पत्र भी लिखा है। इसमें ये मुद्दे प्रमुख रूप से सीएस के ध्यान में लाए गए हैं।
- एनसीईआरटी की किताबों को 1st क्लास से ही अनिवार्य किया जाए, वहीं नर्सरी, केजी-1, केजी 2 की किताबों में 5 वर्ष तक किसी भी बदलाव पर अंकुश लगाया जाए ताकि अभिभावकों पर महंगी किताबों का आर्थिक बोझ न पड़े।
- स्कूलों द्वारा चुनिंदा दुकानों से खरीददारी कराने पर रोक लगे और इस पर सख्त कार्रवाई की जाए। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा पोर्टल पर किताबों की सूची तत्काल डाली जाएं। नियम विरुद्ध मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने वाले स्कूलों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो, 10% का नियम कड़ाई से लागू हो।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत गरीब बच्चों को अनिवार्य रूप से प्रवेश दिया जाए और इसके पालन की निगरानी हो। इसके लिए जिला और प्रदेश स्तर पर उचित शिकायत निवारण प्रकोष्ठ बनें ।
- हर जिले में कलेक्टर कार्यालय में एक विशेष दिन शिक्षा के क्षेत्र से संबंधित शिकायतों की जनसुनवाई की जाए।