भूख-प्यास से तड़पकर एक पक्षी को दम तोड़ते देखा तो खोल दिया 'चिड़ियों का ढाबा'

BHOPAL, MP

बुरहानपुर में भीषण गर्मी में पक्षी प्रेमी ढाबा मालिक ने पूरा ढाबा ही चिड़यों के लिए समर्पित कर दिया. इसकी कहानी भी रोचक है.

जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर इंदौर-इच्छापुर नेशनल हाईवे पर दहीनाला गांव में एक शख्स ऐसा भी है, जो पक्षियों के लिए अनूठा काम कर रहे हैं. दरअसल, 25 साल पहले चारण परिवार ने हाईवे पर ढाबा खोला था. गर्मी के मौसम में पक्षियों को भोजन और पानी के लिए इधर-उधर भटकता देख उनका मन पसीज गया. उनके मन में आया कि क्यों न इन पक्षियों के लिए आशियाना तैयार किया जाए. इसके बाद पक्षियों के रुकने के साथ ही उनके खाने-पीने का इंतजाम किया गया.

ढाबा मालिक ने बनाए पक्षियों के आशियाने

महेश चारण ने अपने ढाबे में चारों ओर पक्षियों के लिए घोंसले तैयार किए. खंभों पर बड़े बारदाने व घास-फूस से घोंसले बनाए. इसमें भोजन-पानी के साथ ही पक्षियों के रुकने का इंतजाम किया गया. देखते ही देखते यहां पक्षियों का कारवां बढ़ता गया. आज इस ढाबे में सैकड़ों घोंसले हैं. इसमें चिड़ियों की विभिन्न प्रजातियां हैं. कबूतर भी आशियाना बनाकर रहते हैं. दरअसल, बुरहानपुर जिले में गौरेया चिड़िया विलुप्त हो चुकी हैं, लेकिन ढाबा संचालक महेश चारण ने गौरेया चिड़िया को रहने के लिए सैकड़ो घोंसले बनाए. इन घोसलों में चिड़ियों को दाना-पानी भी दिया जाता है.

burhanpur birds dhaba
बुरहानपुर में चिड़ियों का ढाबा 
 

धूप में एक चिड़िया की मौत के बाद मुहिम शुरू

ढाबा मालिक महेश चारण बताते हैं "एक बार भीषण गर्मी में तेज धूप से एक चिड़िया मौत हो गई थी. तब मैंने ये प्रण लिया हैं कि मेरे ढाबे पर चिड़ियों के रहने के लिए घोंसले बनाऊंगा और उनको रहने के लिए जगह दूंगा. तब से मैंने ढाबे में खंभों पर सैकड़ो घोंसले तैयार किए. खास बात यह है कि गर्मी के मौसम में पूरे क्षेत्र में चिड़िया कम दिखती हैं, लेकिन यहां सबसे अधिक चिड़िया मिलती हैं. मैं रोज दो किलो रतलामी सेव, मिक्चर सहित चावल, रोटी सहित दाना-पानी मिलाकर इन चिड़ियों को खाने के लिए डालता हूं. अब इस ढाबे को "चिड़ियों का आशियाना" ढाबे के नाम से भी जाना जाता है."

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ढाबा मालिक ने बनाए पक्षियों के आशियाने 
 
आने वाले ग्राहक भी पक्षियों को भोजन कराते हैं

ढाबा मालिक महेश चारण ने जगह-जगह कपड़े, बारदाने की थैलिया बनाकतर टांग दी हैं, जिसमें चिड़िया आसानी से घोंसला बना लेती हैं. इस ढाबे खासियत यह है कि जो भी व्यक्ति यहां खाना खाने आता है तो चिड़ियों की चहचहाहट सुनते ही मन भी प्रफुल्लित हो जाता है. ये लोग अपने भोजन में से कुछ हिस्सा निकालकर इन चिड़ियों के लिए डालते हैं. चिड़िया उनकी टेबल पर आकर खाना शुरू कर देती है, इससे चिड़ियों की संख्या बढ़ गई है.

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